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NCERT का बड़ा फैसला! 9वीं की किताब में अब पढ़ाई जाएगी इमरजेंसी और SIR

NCERT ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब में बड़ा बदलाव किया है। अब छात्र 1975 की इमरजेंसी, SIR, संविधान निर्माण, लोकतंत्र, समानता और नागरिक जिम्मेदारियों के बारे में नए तरीके से पढ़ेंगे।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान (Social Science) की पाठ्यपुस्तकों में बड़े बदलाव किए हैं। नई किताबों में अब छात्रों को 1975 में लागू आपातकाल (Emergency) और SIR (Special Intensive Revision) जैसे विषयों के बारे में भी पढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही संविधान, लोकतंत्र, समानता और नागरिक अधिकारों को समझाने का तरीका भी पहले की तुलना में पूरी तरह नया होगा।

NCERT के सूत्रों के अनुसार, संशोधित पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को भारतीय संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक जिम्मेदारियों को अधिक व्यावहारिक और सरल तरीके से समझाना है।

संविधान को नए तरीके से समझेंगे छात्र

नई किताबों में अब केवल संविधान के अनुच्छेदों या कानूनी प्रावधानों पर जोर नहीं दिया जाएगा, बल्कि छात्रों को यह भी बताया जाएगा कि भारतीय संविधान कैसे बना, संविधान सभा ने किस तरह काम किया और देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं किस प्रकार संचालित होती हैं।

पाठ्यक्रम में संविधान निर्माण की पूरी प्रक्रिया, नागरिकों के अधिकार और कर्तव्य, लोकतांत्रिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली तथा शासन प्रणाली को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाने का प्रयास किया गया है।

इमरजेंसी पर भी होगा विशेष अध्याय

नई NCERT पुस्तक में वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। छात्रों को बताया जाएगा कि आपातकाल के दौरान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा, नागरिक अधिकारों में किस प्रकार के बदलाव आए और उस दौर को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस अध्याय के माध्यम से विद्यार्थियों को लोकतंत्र की मजबूती और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को समझाने की कोशिश की जाएगी।

SIR को भी दी गई जगह

नई किताब में SIR (Special Intensive Revision) का भी उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराना बताया जा रहा है।

समानता, स्वतंत्रता और जिम्मेदारियों पर विशेष फोकस

संशोधित पाठ्यक्रम में छात्रों को केवल अधिकारों की जानकारी ही नहीं दी जाएगी, बल्कि नागरिक जिम्मेदारियों, समानता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी विशेष जोर दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से विद्यार्थियों में संविधान और लोकतंत्र को लेकर अधिक व्यावहारिक समझ विकसित होगी।

नई शिक्षा नीति के अनुरूप बदलाव

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, NCERT की नई पुस्तकें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के उद्देश्यों के अनुरूप तैयार की जा रही हैं। इसमें रटने की बजाय अवधारणाओं को समझने, विश्लेषणात्मक सोच विकसित करने और वास्तविक जीवन से जोड़कर पढ़ाने पर अधिक ध्यान दिया गया है।

क्या होगा छात्रों पर असर?

नई किताबों के लागू होने के बाद छात्रों को भारतीय लोकतंत्र, संविधान, चुनाव प्रक्रिया और ऐतिहासिक घटनाओं की बेहतर समझ मिलेगी। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी लाभ मिल सकता है, क्योंकि संविधान और लोकतंत्र से जुड़े विषय विभिन्न परीक्षाओं में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

हालांकि, पाठ्यक्रम में किए गए इन बदलावों को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं। फिलहाल NCERT का कहना है कि बदलावों का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय लोकतंत्र और संविधान की व्यापक एवं संतुलित समझ देना है।


 

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