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जल संकट से निपटने की तैयारी, कांके डैम की सफाई और संरक्षण में जुटा रांची नगर निगम

रांची नगर निगम ने कांके डैम को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। जलकुंभी, गाद और प्रदूषण हटाने के लिए आधुनिक मशीनों से सफाई की जा रही है, साथ ही ड्रेनों के पानी को डायवर्ट करने की योजना भी लागू की जा रही है।

रांची: झारखंड की राजधानी रांची के प्रमुख जल स्रोतों में शामिल कांके डैम को स्वच्छ, सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में रांची नगर निगम (RMC) ने बड़ा कदम उठाया है। नगर निगम ने डैम के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और जल गुणवत्ता में सुधार के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत डैम में फैली जलकुंभी, गाद और अन्य अवांछित पदार्थों की सफाई अत्याधुनिक मशीनों की मदद से की जा रही है।

नगर आयुक्त के हालिया निरीक्षण के बाद जारी निर्देशों के तहत निगम की विभिन्न शाखाएं समन्वित रूप से काम कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते डैम को प्रदूषण और अतिक्रमण से नहीं बचाया गया तो आने वाले वर्षों में राजधानी के इस महत्वपूर्ण जल स्रोत पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।

रांची के लिए क्यों महत्वपूर्ण है कांके डैम?

कांके डैम केवल एक जलाशय नहीं बल्कि रांची शहर के पर्यावरणीय संतुलन और जल संरक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र है। वर्षों से यह डैम आसपास के क्षेत्रों के लिए जल स्रोत के रूप में कार्य करता रहा है। इसके साथ ही यह क्षेत्र स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र भी माना जाता है।

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में बढ़ते शहरीकरण, अनियोजित विकास, जलकुंभी के विस्तार, गाद जमाव और नालों के प्रदूषित पानी के कारण डैम की स्थिति लगातार प्रभावित हो रही थी। इससे न केवल जल की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा था बल्कि जलाशय की क्षमता भी कम होती जा रही थी।

इन्हीं समस्याओं को देखते हुए रांची नगर निगम ने व्यापक स्तर पर सफाई और संरक्षण अभियान शुरू किया है।

अत्याधुनिक मशीनों से हटाई जा रही जलकुंभी और गाद

अभियान के तहत नगर निगम की स्वच्छता शाखा और ट्रांसपोर्ट शाखा की संयुक्त टीम लगातार डैम में सफाई कार्य कर रही है। इसके लिए पोकलेन मशीन और वीड हार्वेस्टिंग मशीन का उपयोग किया जा रहा है।

वीड हार्वेस्टिंग मशीन के जरिए जलाशय में फैली जलकुंभी को हटाया जा रहा है। जलकुंभी एक ऐसी जलीय वनस्पति है जो तेजी से फैलती है और जलाशयों में ऑक्सीजन की मात्रा कम कर देती है। इसके कारण जल में रहने वाले जीव-जंतुओं और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

वहीं पोकलेन मशीन की सहायता से डैम के तल में जमी गाद को निकाला जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार गाद जमने से जलाशय की जलधारण क्षमता लगातार घटती जाती है। गाद हटने से डैम में अधिक मात्रा में पानी संग्रहित किया जा सकेगा।

जलधारण क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर

नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य कांके डैम की जलधारण क्षमता को बढ़ाना है। हर वर्ष मानसून के दौरान बड़ी मात्रा में गाद और मिट्टी डैम में जमा हो जाती है, जिससे इसकी गहराई कम होती जाती है।

गाद की सफाई से न केवल डैम की संग्रहण क्षमता बढ़ेगी बल्कि वर्षा जल संरक्षण में भी मदद मिलेगी। इससे भविष्य में जल संकट की स्थिति से निपटने में सहायता मिलेगी।

डैम के आसपास झाड़ियों और घास की सफाई

कांके डैम के तटवर्ती क्षेत्रों में वर्षों से उगी झाड़ियां और अनियंत्रित घास भी समस्या का कारण बनी हुई थीं। कई स्थानों पर इन झाड़ियों के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी और क्षेत्र का सौंदर्य भी प्रभावित हो रहा था।

नगर निगम ने इन झाड़ियों और घासों की बड़े पैमाने पर कटाई शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि इससे डैम क्षेत्र अधिक स्वच्छ और आकर्षक दिखाई देगा। साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कैचमेंट एरिया में बनेगा पाथ-वे

नगर निगम केवल सफाई तक ही सीमित नहीं है बल्कि नागरिक सुविधाओं को भी बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

अभियंत्रण शाखा द्वारा पोकलेन मशीन से निकाली गई गाद का उपयोग डैम के कैचमेंट एरिया में अस्थायी पाथ-वे निर्माण के लिए किया जा रहा है। इस पाथ-वे के बनने से लोगों को डैम के एक छोर से दूसरे छोर तक आसानी से पहुंचने की सुविधा मिलेगी।

भविष्य में इसे विकसित कर पर्यटन और मनोरंजन की दृष्टि से भी उपयोगी बनाया जा सकता है।

प्रदूषण रोकने के लिए ड्रेनों का पानी किया जाएगा डायवर्ट

कांके डैम के प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण आसपास के क्षेत्रों से आने वाला गंदा पानी है। कई ड्रेन सीधे डैम में गिरते हैं, जिससे जल गुणवत्ता प्रभावित होती है।

इस समस्या को देखते हुए नगर निगम ने प्रदूषण के स्रोतों की पहचान शुरू कर दी है। तत्काल उपाय के रूप में डैम में गिरने वाले ड्रेनों के पानी को आसपास मौजूद निष्क्रिय अस्थायी तालाबों की ओर मोड़ा जा रहा है।

इससे डैम में गंदे पानी का सीधा प्रवाह रुक सकेगा और जल गुणवत्ता में सुधार आएगा। अधिकारियों के अनुसार यह एक अस्थायी व्यवस्था है। भविष्य में स्थायी समाधान के लिए विस्तृत योजना तैयार की जा रही है।

दीर्घकालिक संरक्षण योजना पर भी काम

नगर निगम का कहना है कि केवल सफाई अभियान चलाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसलिए डैम के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए भी योजनाएं बनाई जा रही हैं।

इन योजनाओं में जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी, अतिक्रमण रोकना, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सीवेज नियंत्रण और पर्यावरणीय जागरूकता कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो कांके डैम को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

नागरिकों से सहयोग की अपील

रांची नगर निगम ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। निगम ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे जलाशयों और नालों में प्लास्टिक, घरेलू कचरा, निर्माण मलबा या अन्य अपशिष्ट सामग्री न फेंकें।

साथ ही डैम क्षेत्र में अतिक्रमण न करने और जल संरक्षण अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाने की भी अपील की गई है।

अधिकारियों का कहना है कि केवल सरकारी प्रयासों से जल स्रोतों को बचाना संभव नहीं है। इसके लिए जनसहभागिता भी उतनी ही आवश्यक है।

भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहेगा जल स्रोत

कांके डैम को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने का यह अभियान केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन को सुरक्षित रखने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है।

यदि नगर निगम की यह पहल सफल होती है तो कांके डैम न केवल रांची के प्रमुख जल स्रोत के रूप में अपनी पहचान बनाए रखेगा, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और जल प्रबंधन का एक सफल मॉडल भी बन सकता है।

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