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RIMS-2 के लिए भूमि पूजन की खबर पर भड़के ग्रामीण, उपजाऊ जमीन बचाने को गाड़े झंडे

रांची के नगड़ी में प्रस्तावित RIMS-2 परियोजना का ग्रामीणों ने एक बार फिर विरोध किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भूमि पूजन की सूचना के बाद ग्रामीणों ने उपजाऊ जमीन बचाने के लिए झंडा गाड़कर प्रदर्शन किया।

रांची: राजधानी रांची के नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित रिम्स-2 (RIMS-2) परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध एक बार फिर तेज हो गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा रिम्स-2 के लिए भूमि पूजन किए जाने की सूचना मिलने के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण अपनी जमीन बचाने के लिए मौके पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन किया।

ग्रामीणों ने परियोजना के लिए चिह्नित भूमि पर झंडा गाड़कर अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि जिस जमीन पर रिम्स-2 का निर्माण प्रस्तावित है, वह अत्यंत उपजाऊ कृषि भूमि है और वर्षों से उनके जीवन-यापन का प्रमुख आधार रही है। ऐसे में इस जमीन का अधिग्रहण उनके भविष्य और आजीविका दोनों के लिए खतरा बन सकता है।

भूमि पूजन की सूचना के बाद बढ़ी हलचल

ग्रामीणों के अनुसार उन्हें मंगलवार देर रात सूचना मिली कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बुधवार को नगड़ी स्थित प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना स्थल पर भूमि पूजन करने वाले हैं। सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों में हलचल बढ़ गई और सुबह होते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण परियोजना स्थल पर पहुंच गए।

ग्रामीणों ने कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी मांग है कि रिम्स-2 जैसी महत्वपूर्ण परियोजना के लिए किसी वैकल्पिक भूमि का चयन किया जाए। उनका तर्क है कि उपजाऊ कृषि भूमि को नष्ट कर विकास कार्य करना उचित नहीं होगा।

"कहीं और बने RIMS-2"

विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि सरकार के पास अन्य कई गैर-कृषि भूमि उपलब्ध हैं, जहां इस परियोजना का निर्माण किया जा सकता है। उनका कहना है कि यदि रिम्स-2 का निर्माण इसी जमीन पर किया गया तो क्षेत्र के कई किसान परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।

ग्रामीणों ने दोहराया कि वे लंबे समय से इस मुद्दे पर अपनी आपत्ति दर्ज कराते आ रहे हैं और उनकी मांग अब भी वही है कि परियोजना को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।

पहले भी हो चुका है विरोध

यह पहला मौका नहीं है जब रिम्स-2 परियोजना को लेकर विरोध देखने को मिला हो। इससे पहले भी स्थानीय ग्रामीण और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आवाज उठाई जा चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी चिंताओं और सुझावों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

विकास और विस्थापन के बीच संतुलन की चुनौती

रिम्स-2 को झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। हालांकि दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के साथ-साथ किसानों और स्थानीय निवासियों के अधिकारों का भी सम्मान होना चाहिए।

अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस विरोध को किस प्रकार संबोधित करते हैं तथा ग्रामीणों की मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं।

क्या है आपकी राय?

क्या RIMS-2 जैसी बड़ी स्वास्थ्य परियोजना के लिए उपजाऊ कृषि भूमि का उपयोग किया जाना चाहिए, या सरकार को वैकल्पिक भूमि तलाशनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

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