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पश्चिम सिंहभूम के स्कूल में मिड डे मील में मिला कीड़ा, बच्चों ने फेंका खाना

पश्चिम सिंहभूम के खुंटपानी प्रखंड स्थित बनामगुटू विद्यालय में मिड डे मील में कीड़ा मिलने से हड़कंप मच गया। बच्चों ने खाना फेंक दिया। प्रखंड प्रमुख ने जांच और कार्रवाई की मांग की है।

पश्चिम सिंहभूम जिले के खुंटपानी प्रखंड स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय बनामगुटू में मिड डे मील को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। बच्चों को परोसे गए मध्यान्ह भोजन में कीड़ा मिलने के बाद स्कूल में हड़कंप मच गया। भोजन देखकर बच्चों ने खाना फेंक दिया और पूरे दिन भूखे-प्यासे पढ़ाई करने को मजबूर हुए।

इस मामले की जानकारी विद्यालय की शिक्षिका एंजिला हेम्ब्रम द्वारा खुंटपानी प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा को दी गई।


शिकायत मिलते ही जांच के लिए पहुंचे जनप्रतिनिधि

सूचना मिलने के बाद खुंटपानी प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा और जिला परिषद सदस्या यमुना तियू विद्यालय पहुंचे और मौके का निरीक्षण किया। जांच के दौरान बच्चों और शिक्षकों से पूछताछ की गई।

जांच में सामने आया कि विद्यालय में भेजा जा रहा मिड डे मील बेहद घटिया गुणवत्ता का है। आरोप लगाया गया कि सेंट्रलाइज्ड किचन के माध्यम से खराब और निम्न स्तर का भोजन बच्चों को भेजा जा रहा है।


“जांच के दिन अच्छा भोजन भेजा जाता है”

प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा ने आरोप लगाया कि जब उच्च अधिकारी जांच के लिए पहुंचते हैं, तो पहले से सूचना मिल जाती है और उस दिन बेहतर भोजन उपलब्ध कराया जाता है। जबकि बाकी दिनों में बच्चों को खराब गुणवत्ता का खाना दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि भोजन में हरी सब्जियों का नामोनिशान नहीं रहता और कई बार सड़े-गले आलू तक भेज दिए जाते हैं। अधिकतर बच्चे ऐसा भोजन खाने के बजाय फेंक देते हैं।


एनजीओ का लाइसेंस रद्द करने की मांग

प्रखंड प्रमुख ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने घटिया भोजन उपलब्ध कराने वाले एनजीओ के लाइसेंस को रद्द करने की मांग की है।

साथ ही जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मामले में तत्काल संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की अपील की गई है। चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो मिड डे मील व्यवस्था को लेकर आंदोलन किया जाएगा।


बच्चों के स्वास्थ्य पर बड़ा सवाल

विद्यालयों में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मिड डे मील योजना चलाई जाती है। लेकिन इस तरह की घटनाएं बच्चों के स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

स्थानीय लोगों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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