Jharkhand News, Ranchi News, Dhanbad News, Anil Sharma, Faheem Khan, Surendra Bangali, Jharkhand Jail News, Life Imprisonment, Jharkhand Government, Samachar Plus, Samachar Plus Jharkhand Bihar | झारखंड
झारखंड

अनिल शर्मा से फहीम खान तक… झारखंड के 53 कैदियों की रिहाई पर सरकार ने लगाया ब्रेक

झारखंड सरकार ने अनिल शर्मा, सुरेंद्र बंगाली और फहीम खान समेत आजीवन कारावास की सजा काट रहे 53 कैदियों की रिहाई का प्रस्ताव खारिज कर दिया। डीसी-एसपी की रिपोर्ट के बाद सजा पुनरीक्षण समिति ने फैसला लिया।

रांची: झारखंड सरकार ने राज्य के विभिन्न जेलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 53 कैदियों की रिहाई के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इनमें रांची के गैंगस्टर अनिल शर्मा, सुरेंद्र बंगाली और धनबाद के फहीम खान समेत अन्य कैदी शामिल हैं। इन सभी की रिहाई के लिए अलग-अलग जेलों से प्रस्ताव भेजे गए थे। गत 30 जुलाई को राज्य सजा पुनरीक्षण समिति की बैठक में इनकी रिहाई की अपील खारिज करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद गृह विभाग ने इससे संबंधित आदेश जारी कर दिया।

20 साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं कैदी

जानकारी के अनुसार, राज्य की अलग-अलग जेलों में बंद आजीवन कारावास की सजा पाए 53 कैदी 20 साल या उससे अधिक समय से जेल में हैं। निर्धारित प्रक्रिया के तहत इनकी सजा की समीक्षा करते हुए रिहाई के प्रस्ताव भेजे गए थे। इन प्रस्तावों पर फैसला लेने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली राज्य सजा पुनरीक्षण समिति की होती है।

डीसी-एसपी की रिपोर्ट के बाद रिहाई पर फैसला

कैदियों की रिहाई के प्रस्तावों पर विचार करने से पहले राज्य सरकार ने संबंधित जिलों के उपायुक्तों (डीसी) और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) से रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट में आशंका जताई गई कि इन कैदियों को रिहा करने से संबंधित जिलों में आपराधिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इसके बाद समिति ने सभी 53 कैदियों की रिहाई के प्रस्तावों को खारिज करने का निर्णय लिया।

चर्चित गैंगस्टरों को भी नहीं मिली राहत

रिहाई का प्रस्ताव खारिज होने से चर्चित गैंगस्टर अनिल शर्मा, सुरेंद्र बंगाली और धनबाद के फहीम खान समेत अन्य कैदियों को फिलहाल राहत नहीं मिली है। लंबे समय से जेल में बंद होने के बावजूद उनकी रिहाई का रास्ता साफ नहीं हो सका। सरकार के इस फैसले में संबंधित जिलों से मिली रिपोर्ट और कानून-व्यवस्था से जुड़ी आशंकाओं को अहम माना गया।

सजा की समीक्षा के बाद लिया जाता है निर्णय

आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों की रिहाई पर निर्णय निर्धारित नियमों और संबंधित मामलों की समीक्षा के आधार पर लिया जाता है। लंबे समय तक जेल में रहने मात्र से किसी कैदी की रिहाई सुनिश्चित नहीं होती। संबंधित प्राधिकरण को उपलब्ध रिपोर्ट और अन्य जरूरी पहलुओं पर विचार करना होता है। फिलहाल झारखंड सरकार के फैसले के बाद इन 53 कैदियों की रिहाई का प्रस्ताव खारिज हो गया है। भविष्य में किसी नए प्रस्ताव पर विचार होगा या नहीं, यह संबंधित नियमों और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

You can share this post!

Comments

Leave Comments