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किन UPI ट्रांजैक्शन पर लगेगा चार्ज, किसे देना होगा, क्या फ्री होगा, जानें सभी ज़रूरी सवालों के जवाब

UPI Payment के नए नियमों में P2P पेमेंट मुफ्त रहेगा। 2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू होगा। जानिए P2P, P2M और MDR के नए नियम।

नई दिल्ली: भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके UPI को लेकर लोगों के बीच एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि व्यक्ति से व्यक्ति यानी Person-to-Person (P2P) UPI पेमेंट पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगा। यानी अगर कोई व्यक्ति अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति को UPI के जरिए पैसे भेजता है, तो इसके लिए उसे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।

हालांकि, बड़े मर्चेंट यानी बड़े कारोबारियों को किए जाने वाले कुछ UPI ट्रांजैक्शन पर MDR (Merchant Discount Rate) लागू होगा। सरकार ने अलग-अलग तरह के मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए MDR की दरें और अधिकतम सीमा तय की है।

ऐसे में आम UPI यूजर के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नए नियमों का उसकी जेब पर कितना असर पड़ेगा? क्या अब UPI से पैसे भेजने पर चार्ज लगेगा? दुकानदार को किए गए पेमेंट का क्या होगा? और MDR आखिर है क्या?

आइए आसान सवाल-जवाब में समझते हैं पूरा मामला।

क्या अब UPI से पैसे भेजने पर चार्ज लगेगा?

नहीं।

अगर आप UPI के जरिए किसी दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजते हैं, तो इसके लिए कोई चार्ज नहीं देना होगा। इसे P2P यानी Person-to-Person पेमेंट कहा जाता है।

रकम कितनी भी हो, P2P UPI ट्रांजैक्शन पर ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। हालांकि, संबंधित बैंक या UPI सेवा की ओर से तय दैनिक ट्रांजैक्शन लिमिट लागू हो सकती है।

सरकार के मुताबिक, UPI के कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब 70 फीसदी हिस्सा P2P पेमेंट का है।

P2P पेमेंट क्या होती है?

P2P का मतलब है Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजना।

उदाहरण के लिए:

  • दोस्त को पैसे भेजना

  • परिवार के सदस्य को पैसे भेजना

  • किसी परिचित को भुगतान करना

  • किसी व्यक्ति से उधार लिया पैसा वापस करना

इन सभी मामलों में अगर पेमेंट सीधे एक व्यक्ति के बैंक अकाउंट से दूसरे व्यक्ति के बैंक अकाउंट में UPI के जरिए हो रही है, तो यह P2P ट्रांजैक्शन है।

इस पर ग्राहक को MDR या कोई अन्य UPI चार्ज नहीं देना होगा।

P2M पेमेंट क्या होती है?

P2M यानी Person-to-Merchant पेमेंट तब होती है, जब कोई व्यक्ति किसी दुकानदार या कारोबारी को UPI के जरिए भुगतान करता है।

जैसे:

  • किराना दुकान पर सामान खरीदना

  • पेट्रोल पंप पर भुगतान करना

  • रेस्टोरेंट का बिल चुकाना

  • किसी दुकान से कपड़े या इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदना

  • किसी कारोबारी को UPI QR कोड के जरिए पेमेंट करना

यहां पैसे भेजने वाला व्यक्ति ग्राहक है और पैसे प्राप्त करने वाला मर्चेंट यानी कारोबारी।

2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट पर क्या MDR लगेगा?

नहीं।

2,000 रुपये तक के सामान्य P2M UPI पेमेंट पर MDR नहीं लगेगा।

इसका मतलब है कि अगर आपने किसी दुकान पर 1,500 रुपये का सामान खरीदा और UPI से भुगतान किया, तो ग्राहक पर कोई चार्ज नहीं लगेगा और इस सीमा के भीतर संबंधित मर्चेंट पेमेंट पर MDR भी नहीं लगेगा।

2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर क्या होगा?

2,000 रुपये से अधिक के सामान्य मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR निर्धारित किया गया है।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शुल्क ग्राहक से नहीं लिया जाएगा।

उदाहरण के लिए, अगर किसी ग्राहक ने 10,000 रुपये का मर्चेंट पेमेंट UPI से किया और उस ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR लागू होता है, तो MDR की गणना 40 रुपये होगी।

लेकिन ग्राहक से 10,000 रुपये के ऊपर अलग से 40 रुपये नहीं लिए जाने चाहिए। MDR का भुगतान मर्चेंट साइड से होगा।

MDR क्या है?

MDR यानी Merchant Discount Rate। आसान भाषा में इसे डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की लागत के तौर पर समझा जा सकता है।

जब कोई कारोबारी डिजिटल पेमेंट स्वीकार करता है, तो पेमेंट सिस्टम से जुड़े अलग-अलग हिस्सेदारों के बीच शुल्क का बंटवारा होता है।

इसमें बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और UPI ऐप से जुड़े पक्ष शामिल हो सकते हैं।

यह सरकार या NPCI की ओर से लगाया गया कोई टैक्स नहीं है।

10,000 रुपये के UPI पेमेंट पर कितना MDR?

अगर किसी सामान्य मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR लागू है, तो 10,000 रुपये के पेमेंट पर गणना के हिसाब से MDR 40 रुपये होगा।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक को 10,040 रुपये देने होंगे।

ग्राहक को UPI इस्तेमाल करने के लिए अलग से 40 रुपये नहीं देने हैं।

सरकार ने यह भी कहा है कि मर्चेंट को MDR का बोझ ग्राहक पर नहीं डालना चाहिए।

क्या MDR की कोई अधिकतम सीमा भी है?

हां।

0.4 फीसदी MDR के साथ अधिकतम MDR सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है।

उदाहरण के लिए, 75,000 रुपये के ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी की गणना 300 रुपये होती है। इसलिए 75,000 रुपये से अधिक के ऐसे सामान्य मर्चेंट पेमेंट में भी MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये रहेगी।

यानी MDR राशि अनिश्चित रूप से बढ़ती नहीं जाएगी।

पेट्रोल, रेलवे और टेलीकॉम पेमेंट पर क्या नियम है?

कुछ आवश्यक सेवाओं के लिए MDR की अलग व्यवस्था रखी गई है।

2,000 रुपये से अधिक के कुछ ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का फ्लैट MDR लागू होगा।

इस श्रेणी में शामिल बताए गए क्षेत्र हैं:

  • रेलवे

  • टेलीकॉम

  • बीमा

  • ईंधन यानी पेट्रोल और डीजल

  • खेती से जुड़े इनपुट

मसलन, अगर किसी पात्र ईंधन भुगतान का मूल्य 2,000 रुपये से अधिक है, तो उस ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का MDR हो सकता है।

लेकिन यहां भी अहम बात यही है कि यह 5 रुपये ग्राहक से अलग से नहीं लिया जाना है।

लोग UPI चार्ज को लेकर चिंतित क्यों हैं?

भारत में UPI पिछले कई वर्षों से आम लोगों के लिए बेहद सुविधाजनक डिजिटल पेमेंट माध्यम बना हुआ है। यही वजह है कि MDR का नाम सामने आने के बाद कई यूजर्स के मन में यह सवाल उठ रहा है कि कहीं भविष्य में इसका बोझ ग्राहकों पर तो नहीं पड़ेगा।

लोगों की चिंता मुख्य रूप से बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन को लेकर है।

यदि किसी कारोबारी की डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की लागत बढ़ती है, तो आशंका जताई जाती है कि वह किसी दूसरे तरीके से अपनी लागत निकालने की कोशिश कर सकता है। उदाहरण के तौर पर सामान या सेवा की कीमत में लागत जोड़ना या कैश पेमेंट को प्राथमिकता देना।

हालांकि, सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए।

क्या UPI ऐप ग्राहक से कोई छिपा हुआ चार्ज ले सकता हैं?

सरकार के नए फ्रेमवर्क में ग्राहकों पर अतिरिक्त शुल्क नहीं डालने पर जोर दिया गया है।

यानी सामान्य व्यक्ति से व्यक्ति UPI पेमेंट को मुफ्त रखा गया है और मर्चेंट पेमेंट में भी निर्धारित MDR को ग्राहक से अलग से वसूलने की व्यवस्था नहीं है।

इसलिए ग्राहक को अपने UPI पेमेंट के दौरान किसी अतिरिक्त शुल्क की मांग होने पर सावधान रहना चाहिए।

शेयर, म्यूचुअल फंड और स्टॉक मार्केट पेमेंट पर क्या होगा?

म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े कुछ पेमेंट के लिए अलग MDR दर निर्धारित की गई है।

इन पर 0.02 फीसदी MDR लागू होगा।

इसकी अधिकतम सीमा भी 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन बताई गई है।

क्या छोटे दुकानदारों पर भी MDR लगेगा?

ज्यादातर छोटे कारोबारी इस व्यवस्था से बाहर रहेंगे।

स्ट्रीट वेंडर, मोहल्ले की दुकान और अन्य छोटे कारोबारी, जो P2M कैटेगरी में आते हैं, अगर UPI QR के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक प्राप्त करते हैं, तो उनके लिए जीरो-MDR व्यवस्था रहेगी।

इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की अतिरिक्त लागत को कम रखना है।

क्या UPI इस्तेमाल करने की कोई मासिक लिमिट होगी?

नहीं।

व्यक्तियों के लिए UPI ट्रांजैक्शन की कोई अलग मासिक सीमा या मुफ्त ट्रांजैक्शन का मासिक कोटा तय नहीं किया गया है।

हालांकि, अलग-अलग बैंक, UPI ऐप या ट्रांजैक्शन के प्रकार के आधार पर दैनिक या अन्य परिचालन सीमाएं हो सकती हैं।

कितने मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लगेगा?

सरकार के मुताबिक, मौजूदा UPI ट्रांजैक्शन में करीब 4 फीसदी मर्चेंट ट्रांजैक्शन ही MDR के दायरे में आएंगे।

इसका अर्थ है कि लगभग 96 फीसदी मर्चेंट ट्रांजैक्शन इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।

इनमें 2,000 रुपये से कम के ट्रांजैक्शन और जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले छोटे मर्चेंट ट्रांजैक्शन शामिल हैं।

MDR से मिलने वाले पैसे का क्या होगा?

सरकार के मुताबिक, MDR से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम और UPI इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।

कुल MDR कलेक्शन का 5 फीसदी एक अलग फंड में दिए जाने की बात कही गई है। इस फंड का इस्तेमाल छोटे कारोबारियों के बीच UPI को बढ़ावा देने और ज्यादा दुकानों को डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जोड़ने के लिए किया जाएगा।

सरकार ने नया फ्रेमवर्क क्यों बनाया?

इस व्यवस्था के पीछे एक प्रमुख उद्देश्य UPI के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखना बताया गया है।

सरकार ने एक तरफ आम लोगों के लिए P2P पेमेंट को मुफ्त रखने पर जोर दिया है, वहीं दूसरी तरफ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए MDR की व्यवस्था की है।

छोटे कारोबारियों को भी काफी हद तक जीरो-MDR व्यवस्था में रखा गया है।

इस तरह नए फ्रेमवर्क में आम यूजर, छोटे कारोबारी और बड़े मर्चेंट—तीनों के लिए अलग-अलग व्यवस्था बनाई गई है।

आम UPI यूजर के लिए क्या समझना जरूरी है?

पूरे मामले को अगर बेहद आसान भाषा में समझें तो:

व्यक्ति से व्यक्ति UPI पेमेंट मुफ्त रहेगा।

2,000 रुपये तक के सामान्य मर्चेंट पेमेंट पर MDR नहीं लगेगा।

2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ बड़े मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू होगा, लेकिन इसका भुगतान ग्राहक को नहीं करना है।

छोटे कारोबारियों के लिए 1 लाख रुपये तक के मासिक UPI कलेक्शन पर जीरो-MDR व्यवस्था बताई गई है।

कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग MDR दर लागू होगी।

यानी नए नियमों में MDR का जिक्र जरूर है, लेकिन इसका सीधा अर्थ यह नहीं है कि अब आम लोगों को हर UPI पेमेंट पर चार्ज देना होगा। सबसे महत्वपूर्ण अंतर P2P और P2M पेमेंट के बीच है।

फिलहाल UPI यूजर्स के लिए यही समझना जरूरी है कि UPI से किसी व्यक्ति को पैसे भेजने पर चार्ज नहीं लगेगा और MDR को ग्राहक से वसूलने की व्यवस्था नहीं है।

 

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